पहाड़ पर दौड़ेगी रेल, बदलेगी उत्तराखंड की तकदीर और तस्वीर


उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन न केवल उत्तराखंड की यात्रा को सुगम बनाएगी, बल्कि राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना की प्रगति पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी डबल इंजन सरकार देवभूमि उत्तराखंड को आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। परियोजना के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित होंगे।

आसान और सुरक्षित यात्रा

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में जहां 6 से 7 घंटे का समय लगता है, वहीं रेल लाइन शुरू होने के बाद यह दूरी सिमटकर मात्र 2 से 2.5 घंटे की रह जाएगी। बरसात और भूस्खलन के दौरान बंद होने वाली सड़कों की समस्या से भी राहत मिलेगी।

चारधाम यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा

यह लाइन बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के मार्ग को बेहद सुगम बनाएगी। श्रीनगर, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख स्टेशनों से कनेक्टिविटी बढ़ने के कारण होम-स्टे, होटल, गाइड और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय में भारी उछाल आएगा।

पलायन पर रोक और रोजगार के अवसर

 

पर्वतीय इलाकों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और स्थानीय उत्पादों (जैसे मडुआ, सेब, जड़ी-बूटियां) के व्यापार को नया बाजार मिलेगा। जब पहाड़ों में व्यापार और स्वरोजगार बढ़ेगा, तो युवाओं को काम की तलाश में मैदानी इलाकों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

सामरिक और आपातकालीन बढ़त

 

चीन सीमा के निकट होने के कारण यह रेलवे लाइन केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति के लिए भी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में पहाड़ों से मरीजों को ऋषिकेश या एम्स देहरादून तक पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा।

 

इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल

लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 100 किलोमीटर से अधिक हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। इस लाइन पर 12 नए स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो गढ़वाल के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़ेंगे। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूर्ण होने से उत्तराखंड केवल आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ढांचागत विकास और आधुनिक कनेक्टिविटी का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरेगा।



Source link

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य से जुड़े 17 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में सहकारिता, परिवहन, स्वास्थ्य, कार्मिक और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। औषधि और सर्जिकल सामग्री की खरीद के लिए उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के गठन को मंजूरी दी गई। यह कॉरपोरेशन मुख्य सचिव की अगुवाई में काम करेगा और औषधि, सर्जिकल सामग्री व रसायनों की खरीद करेगा। बैठक में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के लिए हरिद्वार में एक एकड़ भूमि देने और कारापाल सेवा नियमावली को मंजूरी देने का निर्णय भी लिया गया। सहकारिता नीति-2026 को मंजूरी देने के साथ ही सीएनजी वाहनों को ग्रीन सेस में मिली छूट जारी रखने का फैसला किया गया। लोकायुक्त खोजबीन समिति को मंजूरी उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 के तहत सदस्यों के चयन के लिए उत्तराखंड लोकायुक्त खोजबीन समिति-2026 के गठन को मंजूरी दी गई। उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण अभिलेख नियमावली को भी स्वीकृति दी गई। सीड्स निगम के कर्मचारियों का समायोजन उत्तराखंड सीड्स एवं डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया जाएगा। इन कर्मचारियों को ऊधमसिंह नगर और आसपास के जिलों में भेजने का निर्णय लिया गया है। रिस्पना नदी के किनारे काठ बंगला क्षेत्र में बने 116 आवासों में रह रहे मलिन बस्ती के लोगों से ली जाने वाली 10 प्रतिशत राशि अब सरकार वहन करेगी। शहरी निकायों में पेयजल और सीवरेज कार्यों के लिए भी मंजूरी दी गई। ऋषिकेश में कैंसर इंस्टीट्यूट का प्रस्ताव मंजूर अंत्योदय फाउंडेशन की ओर से ऋषिकेश में कैंसर इंस्टीट्यूट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत उत्तरांचल विश्वविद्यालय की नियमावली को भी स्वीकृति प्रदान की गई। उपनल कर्मचारियों को तीन चरणों में समान कार्य-समान वेतन उपनल कर्मचारियों को तीन चरणों में समान कार्य-समान वेतन देने का निर्णय लिया गया है। दूसरा चरण नौ नवंबर से शुरू होगा। वर्ष 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ मिलेगा। एक जनवरी 2016 से ब्रेक वाले कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने का फैसला किया गया है। स्वीकृत पदों के सापेक्ष काम नहीं कर रहे उपनल कर्मचारियों की स्थिति के आधार पर नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके लिए शासन स्तर पर समिति गठित होगी। कर्मचारियों को परिवर्तनीय महंगाई भत्ता भी मिलेगा। नए पद सृजित नहीं होने की स्थिति में समायोजन किया जाएगा। अग्निवीरों के लिए बनेगा अलग प्रकोष्ठ सेवा मुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। इसके लिए छह पदों का प्रस्ताव रखा गया था। अग्निवीरों से संबंधित कार्यों के लिए अलग सेल गठित की जाएगी। 1320 मेगावाट का पावर प्लांट लगाएगा अडानी यूपीसीएल की ओर से 1320 मेगावाट के कोयला आधारित पावर प्लांट के लिए न्यूनतम बोलीदाता अडानी को जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक का आवंटन हो चुका है। अडानी पावर यह प्लांट स्थापित करेगा। परियोजना 25 वर्ष के लिए दी गई है। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए बजट बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए पंचायतों और निकायों को बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों को निविदा प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश के बाद तुरंत काम शुरू कराया जा सके। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर नजर चीनी समेत आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और जमाखोरी पर अधिकारी लगातार नजर रखेंगे। सरकार ने अधिकारियों को बाजार में आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की कालाबाजारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। गांवों में लगेंगी शहीदों की प्रतिमाएं उत्तराखंड के शहीदों की प्रतिमाएं उनके गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार ने इस संबंध में भी प्रस्ताव को मंजूरी दी है।